Monday, November 19, 2018

सोचते हर पल - 2 Post-17

सोचते हर पल - 2

जवां हुआ पुत्र कदम उन्नीस में
पिता के कद सा माँ के नूर में
ख्याइश को जोड़ता हर श्वास में
स्वपन हो सत्‍य दिल एक आस में

पर उम्र लिखा लाया यूं जज्बात में
दिया ग़म जीवन भर उम्र के इस पड़ाव में
क्या सोचते थे क्या है पाया
हुए किनारे प्रतित नयन खुले सैलाब में

सोचते हर पल
क्या चाह रहे थे हम
वक़्त किधर निकला
अच्छे वक़्त के इंतज़ार में
बुरा वक़्त सब कुछ ले निकला...

Post : 17
रजनीश राय
Written : 20.11.2018
©rajnishrai