Tuesday, October 5, 2021

ख्वाबों की लंबी उड़ान - समर-मीठा फल

ख्वाबों की लंबी उड़ान ...

हुआ शुरू जब खेल इज़हार का
बैठे सोचते हम प्यार की मिठास को
हाथ ली कलम लिखने अपने खास को
यूं कलम लिए सोचते 
क्या लिखे हजूर को
कुछ लिखते बनता ही नहीं
यादें ही यादें दिल की गहराईयों में
जिन्हे याद किए बगैर दिल क्यों थमता नहीं
पर यादों के सहारे समय कटता नही 

फिर सोचते दिल तो है तुम्हारे पास 
किसी को दिया नहीं
चाहे लाख कहो पास नहीं है तुम्हारे
है हमारे पास भी तो नहीं

इश्क का मर्ज है ही ऐसा
साथ रह कर भी लगे तुम पास नहीं
दूर रहे तो लगे शायद तुम आस पास कहीं
ख्वाबों की ऐसी लंबी उड़ान 
किसी के पास नहीं
किसी के पास नहीं।।।

रजनीश राय

मोहपाश - The Black holes of our Society

भ्रम रहे हर पल 
आवाज आयी दूर पायल की 
कभी लगे 
खनकनाती उसकी हसीं पास की 
हो एहसास कभी 
फिज़ा में खुश्बू हमारे प्यार की 
चलती हवा की थरथरात  कहे 
शायद गया पास से अभी कोई  
आंखे भी तकती हर परछाई 
आया कोई अपना सा कहीं  

कब तक रहे इस मोहपाश में 
आगे तो जरा रखो कदम 
आज मन में ठान  
करेंगे दिल का इजहार हम

दिन आया शाम ढलने का वक़्त 
देखें उन्हें उधर से आते एक टक 
हिम्मत करके कदम आगे बढ़ाया 
पास पहुंचे जब उनके हम 
उनको प्रतिक्रिया वंचित पाया 
काँच सा पार होते उनको पाया 
हाथ हवा में 
पर कुछ छु न पाया 

तभी कुछ लोगो का डरता सा 
इस जगह से तेज चलने पर 
कुछ वार्तालाप सुन पाया 
सुनते हुआ सब मोह भंग 
आँखों में तैरते असंख्य गम 
कानो में गिरे जैसे मोम गरम 
दिल भी अब गया पूर्ण सहम 

अच्छा था वह जवान किसकी लगी नज़र 
जो यहाँ पर अनजान सा मृत पाया 
सुना है आज आज भी वह प्रेत बन इस राह 
अपनी प्रियंका को खोजते भटकते पाया 
जातिवाद की भेट या सभ्य समाज 
कहने वालों के नाम खुद की बलि चढ़ा आया 

न जाने जातिवाद कितनो को निगला 
समाज बदला पर इंसान न बदला  
जातिवाद धब्बा समाज का 
सोच गर बदली आज भी बदला 
इंसान बदला तो पूर्ण समाज बदला 

विनती है पूर्ण समाज से 
ऐसे न बांटो धर्म, जाति, समाज में हर इंसान को 
इंसान बन जन्म लिया संसार में 
तो क्यों न हो हर अधिकार इंसान को 


रजनीश राय 
०५ अक्टूबर २०२१ 




इंसान रूप में जन्मे बस इंसान ही रहना - The Black holes of our Society

खुशी का वह पल अरमानो संग आया 
जिधर देख्ने  हँसता हर एक समां  पाया 
यार दोस्त लगाते ठहाकों की उठती गूंज 
खिलखिलाते बच्चों के चेहरों पर महकता नूर 

साथियों यहाँ से पढ़ना हो गंभीर 
क्या क्या होता कभी ऐसे भी 
ये हम सबको जानना जरूर 

शादी दोस्त की 
हम भी बारातियों संग शुमार 
रात का वक्त शोर बारात का 
देख इक शक्श ने शर्मदिंगी को किया तार तार 
आज सोच कर भी हाथ पैरों में कम्पन आये बार बार 
बालिका उम्र सिर्फ ५  या ७  की 
दे चॉकलेट पास बुलाया 
अंधरे कमरे और बारात के शोर में 
हवस का शिकार बन रूह को भी रुलाया 
इंसानियत को कलंकित कहलाया 
कोसे खुद को आज हम 
आदम रूप में क्यों जनम पाया 

आज लिखते उस दुखद वाक्य को 
माँ बाप का वह दर्द वह रोता चेहरा 
एक एक क्षण कोसते दर्द जुबां पर आये 
माँ, बहन, स्त्री, फिर बेटी कितने रूप पाए 
बालिका भगवन रूप भी कहलाये 
नादान बालिका क्या दोष की सजा  
या बालिका रूप में जनम लेना अभिशापित कहलाये 

दो दिन कैंडल रूपी प्रदर्शन, चार दिन संगठन प्रदर्शन 
या राजनयिक  प्रदर्शन नहीं है करना
परिवर्तन के रूप में आने वाले नौजवान और 
एक एक बालक को इस शैतानी प्रवृत्ति से दूरी है बनाना
घर से ही शुरू कर इस अध्याय को सब तक है पहुंचाना 

विनीति है सबसे इंसान रूप में जन्मे बस इंसान ही रहना 
समाज में ऐसी शैतान परिवर्ती को कभी क्षमा न करना 
बाल शोषण के इस रुद्र रूप या 
दूसरे रूप को समाज में न पनाह न ही पनपने देना 
बाल शौषण को सदा के लिए समाज से मुक्त है करना। .. 

रजनीश राय 
३० सितम्बर २०२१