खुशी का वह पल अरमानो संग आया
जिधर देख्ने हँसता हर एक समां पाया
यार दोस्त लगाते ठहाकों की उठती गूंज
खिलखिलाते बच्चों के चेहरों पर महकता नूर
साथियों यहाँ से पढ़ना हो गंभीर
क्या क्या होता कभी ऐसे भी
ये हम सबको जानना जरूर
शादी दोस्त की
हम भी बारातियों संग शुमार
रात का वक्त शोर बारात का
देख इक शक्श ने शर्मदिंगी को किया तार तार
आज सोच कर भी हाथ पैरों में कम्पन आये बार बार
बालिका उम्र सिर्फ ५ या ७ की
दे चॉकलेट पास बुलाया
अंधरे कमरे और बारात के शोर में
हवस का शिकार बन रूह को भी रुलाया
इंसानियत को कलंकित कहलाया
कोसे खुद को आज हम
आदम रूप में क्यों जनम पाया
आज लिखते उस दुखद वाक्य को
माँ बाप का वह दर्द वह रोता चेहरा
एक एक क्षण कोसते दर्द जुबां पर आये
माँ, बहन, स्त्री, फिर बेटी कितने रूप पाए
बालिका भगवन रूप भी कहलाये
नादान बालिका क्या दोष की सजा
या बालिका रूप में जनम लेना अभिशापित कहलाये
दो दिन कैंडल रूपी प्रदर्शन, चार दिन संगठन प्रदर्शन
या राजनयिक प्रदर्शन नहीं है करना
परिवर्तन के रूप में आने वाले नौजवान और
एक एक बालक को इस शैतानी प्रवृत्ति से दूरी है बनाना
घर से ही शुरू कर इस अध्याय को सब तक है पहुंचाना
विनीति है सबसे इंसान रूप में जन्मे बस इंसान ही रहना
समाज में ऐसी शैतान परिवर्ती को कभी क्षमा न करना
बाल शोषण के इस रुद्र रूप या
दूसरे रूप को समाज में न पनाह न ही पनपने देना
बाल शौषण को सदा के लिए समाज से मुक्त है करना। ..
रजनीश राय
३० सितम्बर २०२१