Wednesday, August 25, 2021

bio

मेरा नाम रजनीश राय है। मेरा जन्म हरियाणा के अंबाला शहर में हुआ है।

हमेशा ही कुछ अलग लिखते रहना मेरी रूचि है परन्तु इस दर्द को उजागर करना आज की आवश्यकता थी , इस COVID  रूपी त्रासदी के असहनीय दर्द को शब्दों में डालने की कोशिश की है  उम्मीद है आप लोगो तक वो दर्द की टीस पहुंचगी। एक ऐसा दर्द जो बयान न हो।।।लिखना जब शुरू किया तो पता नहीं था कैसे लोगों को अपने दिल की बात या अपने उन  शब्दों को कविता में ढाल पाउँगा । कोशिश की है lockdown से आज तक का असहनीय सफर पंक्तियों में बांध सकूँ। 

दिन गुजरते गए दर्द बढ़ते गए पलायन होते गए किसी के दोस्त किसी के रिश्ते सदा के लिए दूर होते गए। .. 

आशा करता हूँ पसंद न आये किसी को यह कवितायेँ  सिर्फ दर्द को हम सब समझे या करें साँझा। 


नाम : रजनीश राय
पिता जी का नाम : जीत राम राय
माताश्री का नाम : उर्मिला देवी
शिक्षा : एमबीए मार्केटिंग एंड फाइनेंस।
स्थाई निवास : हैदराबाद , तेलंगाना
ईमेल : rajnishrai71@gmail.com
इंस्टाग्राम : rajnishrai71

ट्विटर : rajnishrai71 


मेरा नाम रजनीश राय है। मेरा जन्म हरियाणा के अंबाला शहर में हुआ है। हमेशा ही कुछ अलग लिखते रहना मेरी रूचि है, लिखना जब शुरू किया तो पता नहीं था कैसे लोगों को अपने दिल की बात बता पाऊंगा अपने उस छुपे से दर्द को शब्दों में बयान करूं। समय के साथ उस दर्द को धीरे-धीरे कविता के शब्द पिरोता रहा, और अब बचपन के कवि रूप के सपनों को हकीकत का रूप देने की कोशिश है। उम्मीद है आप लोगो तक वो दर्द की टीस पहुंचगी। एक ऐसा दर्द जो बयान न हो।।।

नाम : रजनीश राय
पिता जी का नाम : जीत राम राय
माताश्री का नाम : उर्मिला देवी
शिक्षा : एमबीए मार्केटिंग एंड फाइनेंस।
स्थाई निवास : हैदराबाद , तेलंगाना
ईमेल : rajnishrai71@gmail.com
इंस्टाग्राम : rajnishrai71
ट्विटर : rajnishrai71

 

अपने उस छुपे जज्बातों को शब्दों में बयान कर पाउँगा । समय के साथ उस प्यार,सुख, त्रासदी, दुःख या दर्द को धीरे-धीरे कविता के शब्द पिरोता रहा, और अब बचपन के कवि रूप के सपनों को हकीकत का रूप देने की कोशिश है। उम्मीद करता हूँ आप लोगो के दिल तक वो जज्बातों को पहुंचा पाउँगा ।।।


मेरा नाम रजनीश राय है। मेरा जन्म हरियाणा के अंबाला शहर में हुआ है।

हमेशा ही कुछ अलग लिखते रहना मेरी रूचि है परन्तु इस दर्द को उजागर करना आज की आवश्यकता थी , समाज के ब्लैक होल्स असंख्य है कुछ मुद्दों पर प्रकाश डालने की कोशिश की है शायद कवि की कविता के माध्यम से समाज की बेहतरी में कुछ योगदान दे सकूँ बस इतना सा प्रयास है   असहनीय दर्द को शब्दों में डालने की कोशिश की है  उम्मीद है आप लोगो तक वो दर्द की टीस पहुंचगी।  

जुर्रत तो की हमने चांद पाने की

पर खुद तारे न बन सके कभी हम 

हमारा प्यार था रास्ते का पत्थर

या पत्थर थे रास्ते के हम


रजनीश राय हैदराबाद से है। यह एमबीए मार्केटिंग एंड फाइनेंस है। इन्हें किताबें पढ़ना और लिखना, संगीत और स्वयं गाना बहुत पसन्द है। इन्होंने अकस्मात मृत्यु, आत्महत्या, लॉकडॉन, पलायन, बाल शौषण, जातिप्रथा और प्रेम इत्यादि पर अनेक कविताएं लिखी हैं।

ये अपने जीवन में समय के साथ प्यार,सुख, त्रासदी, दुःख या दर्द को कविता के शब्द पिरोने की कोशिश करते रहते है। उम्मीद है आप लोगो के दिल तक वो अनछुए जज्बातों को पहुंचा पाएंगे।


मेरा नाम रजनीश राय है। मेरा जन्म हरियाणा के अंबाला शहर में हुआ है। हमेशा ही कुछ अलग लिखते रहना मेरी रूचि है, लिखना जब शुरू किया तो पता नहीं था कैसे लोगों को अपने दिल की बात बता पाऊंगा अपने शब्दों को साकार रूप दे पाउँगा। समय के साथ उन शब्दों को धीरे-धीरे कविता का रूप देता गया और कविता संकलन के साथ जुड़ता रहा , इस बार प्यार रूपी परिभाषा को अलग रूप देने की कोशिश है। उम्मीद है आप लोगो तक वो प्यार की कशिश पहुंचगी। 

उपलब्धि : अमोदिनी स्याही , Charm in your Arms, The Black Hole of our Society, बीते लम्हों की याद में, Panademic , Love you Hamesha, मेरी बेबाक कलम इत्यादि 


शिक्षा : एमबीए मार्केटिंग एंड फाइनेंस।
स्थाई निवास : हैदराबाद , तेलंगाना
ईमेल : rajnishrai71@gmail.com
इंस्टाग्राम : rajnishrai71
ट्विटर : rajnishrai71

रजनीश राय हैदराबाद से है। यह एमबीए मार्केटिंग एंड फाइनेंस है। इन्हें किताबें पढ़ना और लिखना, संगीत और स्वयं गाना बहुत पसन्द है।
हमेशा ही कुछ अलग लिखते रहना आपकी रूचि है, लिखना जब शुरू किया तो पता नहीं था कैसे लोगों को अपने दिल की बात पहुंचा सकेंगे। समय के साथ उन शब्दों को धीरे-धीरे कविता का रूप देते गए और कविता संकलन के साथ जुड़ते रहे , इस बार प्यार रूपी परिभाषा को अलग रूप देने की कोशिश है। उम्मीद है आप लोगो तक उनकी वो प्यार की कशिश पहुंचगी। 

आपकी उपलब्धियां  : अमोदिनी स्याही , Charm in your Arms, The Black Hole of our Society, बीते लम्हों की याद में, Panademic , Love you Hamesha, मेरी बेबाक कलम, Samar- Ek Mitha Phal, Mere Humsafar, Gehraiyon se bhara Atamvishwas, Kalam Bejubaan, Unsaid Feelings इत्यादि 

स्थाई निवास : हैदराबाद , तेलंगाना

ईमेल : rajnishrai71@gmail.com
इंस्टाग्राम : rajnishrai71
ट्विटर : rajnishrai71

Bio: 
Rajnish Rai is from Hyderabad. He is MBA Marketing and Finance. 

He Enjoys reading and writing books, music and singing as well. It is always your interest to keep writing something different, when started writing he was unaware how it will reach to the heart of people. 

Overtime, those words were gradually given the form of poetry and were associated with the collection of poems as well. This time there is an attempt to give a different look to the definition of Friendship. Hope it will reach you deeply.

Your Achievements: Amodini Syahi, Charm in your Arms, Pandemic, The Black hole of our Society, Ek cup chai or coffee, Bitey Lamhon ki Yaadon mein, Love you Hamesha, Meri Bebaak Kalam, Samar-Ek Mitha Phal, Mere Humsafar, Ghariyon se bhara Atamvishwas, Kalam Bejubaan, Unsaid Feelings etc...

Permanent Residence: Hyderabad (India)

Email : rajnishrai71@gmail.com
Instagram: rajnishrai71
Twitter: rajnishrai71
Mobile No. 8686838054


Saturday, August 21, 2021

कुछ पहचान रख लो

आयी त्रासदी सब कुछ गया बदल 
जीवंत से माहौल में हर पल आंतक 
बालपन का सिमित समय बना नीरस 
यूं जवानी का जीवंत पल हुआ बेबस 
तो हुई वृद्ध अवस्था भी अंत्यत बोझिल 

इंसान हुआ बेबस कुछ इस तरह 
ले रहा सांसें भी सोचकर 
कह रही मायूसी मुख पे 
न जाने क्या सोचे हल पल 

लाये त्रासदी एक नया मोड़ हर पल 
जीने की होड़ हर पल एक नया मोड़ 
किसी ने खोया मित्र बंधू 
तो रोये कोई खून के रिश्तो को गवाकर 

त्रासदी का कुछ ऐसा चला चक्र 
पलायन का दर्द भी रहा एक बोझ बनकर 

लगी औषदी भी प्रतिस्पर्धा की दौड़ 
हर देश कहें हम है बेहतर 
देश से दूसरे देश  
शहर से अपने शहर को लगा पहरा 
अनिवार्य औषदि पत्र लगे पहचान पत्र हो सबका 

सोंचे तो लगे क्या और क्यों है ये सब 
लगे कभी एक चाल सा 
राजनीति को भी सोचा बहुत 
क्या यह उदेशय वव्यवसाय का 

आप सब है बुद्धिजीवी कुछ तो बोलो 
हम कवियों की है सिमित सोच
आप कुछ तो पहचान रख लो 
पहचान रख लो। ...  


रजनीश राय 
२१ अगस्त २०२१ 

Friday, August 20, 2021

पलायन का दर्द

त्रासदी के क्या उठे कदम 
लॉक डाउन का हुआ आगमन 
देश हुआ पुर्ण स्थिर
व्यापर, नौकरी वालो ने ली घर की शरण 

हम लगे कुछ लिखने उस त्रासदी के गम 
सोच उन दिन दिहाड़ी मजदुर के संग 
सोच उन बेबस बुजुर्ग महिला पुरुष 
क्या बेचते यूं फूल या सब्जी प्रतिदिन 

एक रूप देखा ऐसा बयान करें तो भी न होगा कम 
आये नए शहर गांव से कुछ रोजी रोटी कमाने 
रास्ता ये उचित हो परिवार का लालन पालन 
समय ने यह क्या ली करवट 
रह गए अपने ही देश में बन के एक बंधक हम 
दिन बड़े ओर बढ़ते गए 
त्रासदी के समाचार और विचलित करते गए 
क्या ट्रैन क्या बस या हवाई यात्रा सब हुए स्थगित 
त्रासदी के भय ने सब तो किया यूं कमरों में बंद 

पर संदेश न हुए बंद 
कभी रोये माँ तो कभी पत्नी भोले बचो संग 
आ जाओ क्या पता हो न कभी मिलन 
क्या पिता क्या पुत्र सब हुए नेत्र नीर संग 
पग न सूझे कोई कब तक रहे 
यूं बंद कमरों में कब तक रहे सोचते हम 

मन में ठान कुछ अनोखा सा प्रण 
चल पड़े मुसाफिर घर कुछ यूं साइकिल पर 
या चल पड़े पैदल ही क्या सोचकर 
जवान पुरुष क्या स्त्री बच्चे और क्या बुजुर्ग
सर पे थामे पोटली हाथ बच्चो के संग  
लम्बा है  कितना रास्ता ये सोच न रख साथ 
पानी की बोतल कुछ रोटी संग कटा रास्ता 
कोई पहुंचा घर हफ्तों में तो कोई हैअभी तक लापता 
सोच कर ही हुआ मन विचलित  
दशा क्या करूँ ब्यान उनकी जानकर 

ह्रदय हुआ शर्मसार 
इंसान और इंसान में भेद जानकर 
मानवता हुई शर्मसार 
सब है बराबर बोलने वालों की सचाई जानकर 
जब त्रासदी ने न किया भेद 
इंसान को क्यूँ न आया समझ यह देखकर। 
विचलित ह्रदय कोसे हर पल पल 
पलायन का दर्द रहेगा एक बोझ बनकर 
एक बोझ बनकर। .. 

रजनीश राय 
२० अगस्त २०२१ 


Saturday, August 14, 2021

मानवता दूषित हो गई

अंधकार सा है बिखरा 
जिधर देखो सनाट्टा पसरा 
गतिमय जीवन हुआ स्थिर 
सोच हुई प्रतिबंदित 
चेहरे पे सब के कुछ उदासी छायी 
कुछ न सूझे  किसी को 
लगा एक अनजान सा भय 
क्या है वो किधर से यूं पास न आ जाये 
 
शोर सिर्फ एम्बुलेंस का 
करता विचलित सबको 
सुनसान हुए सब रास्ते 
किधर हुआ वह माहोल शोर का
चहचाना  पक्षियों का 
अब विचलित करने लगा सबको 

चिकित्सालय में लगा जमघट 
कृतम सांसों की जरुरत सबकी 
मायूस चेहरे तकते एक दुसरे को 
चिक्तिसक बने दुआ सबकी 

मौत का तांडव है गहरा 
मृतक को न मिले अर्थी का सहारा 
पारदर्शी बैग हुआ यूं अंतिम सहारा 
इंसान बेबस अपनों का सिर्फ देखता चेहरा 
शमशान में लगे चिताओं का मेला 
पंक्तिबद्व हुए मृतक कहीं कुछ न बदला 
त्रासदी आयी ऐसे 
बहा ले गयी सब कुछ 
मात पिता को खोया तो कुछ ने दादी नानी के दुलार को 
खोया सहारा किसी ने तो किसी ने खुद के सहारे को 
पर रोक न पाए इस त्रासदी को 

कैसी आयी लहर समझ न पाए इंसान 
प्रति क्षण कोसे हर एक इंतज़ाम 
लगा भगवन ने भी किये किवाड़ बंद
प्रगति की हमने जितनी  
लगा आज अभिशाप बन गयी 
विस्तारवाद के लालच में 
नए नए विनाशक अस्त्र की होड़ में
मानवता दूषित हो गई 
मनुष्यता लुप्त हो गई।।।।

रजनीश राय 
१३ अगस्त २०२१ 

Friday, August 13, 2021

अंधेरे रास्ते को करें अवगत

जब हो प्रतीत तब स्मृति न बने अतीत 
पंक्तियों की करवट ने दी दस्तक 
सोच कर यादों में हुई हरकत 
सोचा कहीं लेख न बन जाए 
कविता लिखते लिखते
छीन न जाए यूं कवि शीर्षक

अंधेरे रास्ते को करें अवगत
दौड़ रहे नौजवान जिसपर सरपट सरपट 
खुद में हुए गुम लगा वक्त यूं ठहरा 
स्मरण आया पड़ोस का वो सुंदर नौजवान
खिलखिलाता वो मनमोहक चेहरा
भुजाओं में दौड़े जैसे गर्म लहू गहरा

कुछ संगत से न अवगत 
न चालाकी की संगत
भोल्पन में बड़प्पन 
जवानी की नासमझ 

रास्ता बहका नशे में कुछ कम  
फिर जहरीले ड्रग्स को लिया अपनी शरण 
बढ़ते बढ़ते हुआ बड़ा हर एक वयसन 
मुड़ना तो दूर सोच बन गयी प्रतिबंद 

कुछ कहना सुनना अब सब हुआ बंद 
संगत हुई नदारद बस खामोशी रही संग 
वापसी की न राह सोच लगने लगा हरदम 

आयी कुछ ऐसी खबर 
कानो न यक़ीन हुए नेत्र नीर भी कम
सोच कर हुए हाथ पैर सुन्न
न रहा जवान लिया मौत को थाम 

किसको दे सब्र हर इंसांन परेशांन 
ऐसा पग क्यों थामे जहाँ की राह गुमनाम 
सोचो जन्मदाता की कभी मिले यूं राह अपरिचित अनजान 
गलत दिशा राय न देंगे मन में लो ठान 
 
चाह कर भी न लो यह कदम विनिती हरदम 
न रखो यह सोच करें फरियाद तुमसे ऐ जवान 
इस ह्रदय-विदारक सोच के आगे भी है कदम 
यूं बदल इस सोच बनो एक क्रियात्मक उदहारण 

रजनीश राय 
१३ अगस्त २०२१