Tuesday, April 14, 2020

आँखों की नमी... post ~ 19

आँखों की ओट से 
छुपे गर्म बूंद बनके
आने को बेताब से 
पर रुक जाते कुछ सोच के।।

हृदय दे ना साथ 
मस्तिष्क करे सवाल 
जीवन रूपी इस पगडंडी 
हम बहुत कुछ गए हार ।। 

क्या नाम दे इस दर्द को 
सोच के भी हो दर्द 
काश हम भी रो सके 
बेधड़क बेधड़क।। 

दिन चढ़ता रात उतरती 
आँख की नमी 
न होती कम 
न होती कम.....

Post : 19
रजनीश राय 
Written on : 14.04.2020 @ 20:30
©rajnishrai