चेहरे पे मासूमियत
जैसे हया को रखा हो कैद कर
नूर चेहरे का बना क्यामत,
होती बैचन घुंगराली जुल्फें लटक कर
लाल हुई मेहंदी गोरे गोरे हाथों पर
बिंदिया दिखे घूंघट की आड़
जैसे देखे बदली में चांद झांक कर
दिखती पैरो की पायल कभी
जैसे आलते संग घनिष्ठता बड़ाकर
लाल रंग साड़ी
संग खनकती चूड़ियां
क्या दे नाम इन सब को
बोलती खामोश दिल की बैचैनियाँ
प्रथम दिन या रात आज शादी के बाद
कहे कोई सुहाग रात तो कोई शर्माए
क्या हुआ आज इस दिल को
क्यों है धड़कने बेचैन
मिला संगी हमे ऐसा
जिसको तरसते थे नैन
हमारा पहला प्यार जिसको आज समाज से पाया
कह संगनी हमने और मान बढ़ाया
रात गुजारी कुछ खट्टी मिठी बातों में
हुई सुबह पता न चला मीठी यादों के आगोश में
हम हुए जैसे ऋणी ऐसे बंधन में उनको पाकर
पिछले जन्म के अच्छे कर्म हमको मिले यहाँ पर
हर पल बना हंसी हर पल महकाए
महकती सी हंसी जैसे खिलकलाता पुष्प
आवाज प्रतीत पहली बारिश के बूंदों की झलक
चलने पर आए पायल की घुंगरू की खनक
पास से गुजरे तो आए हवा संग फूलों की महक
ये जीवन लगे अब अति सुंदर
मोह के धागे में बन्दते हर पल
कभी वो गुस्सा और कभी प्रेम
रूठना मानना लगे जैसे एक खेल
नजर न लगे कहीं खुद की
सोचते डरते बस हर पल
प्यार को बांध रहा प्यार
इज्जत और इज़ाजत सब को समेट कर
हंसते हंसते कटें बस ये हँसी पल
रजनीश राय
१९/०५/२०२२
१२:०२
पुत्री मां पिता की दुलारी आए सब छोड़ के
कितना विशाल हृदय रख कदम नए दौर में
विश्वास रूपी बंधन पे विश्वास की आजमाइश
निभाना होता है कैसे सोचते बन ख्वाइश
कभी हो भ्रमित कही कुछ खेल तो नही
हंसते चेहरों के पीछे कोई भेद तो नहीं
सब आशंकांओं को धकेलते कोसों दूर
खुशबू की तरह सब को ले अपना बना लेते जरुर
हर पल हम देते सिर्फ वक्त को दुआएं