आज वो जख्म नासूर हुए
जिनके तसव्वुर में हम मशहूर हुए
आज हम यूं खुद से बेबस मजबूर हुए
राज क्या हुए उनके बेनकाब
फेरहिस्त बेहिसाब
दिल ए सब्र मिला सिला लाज़वाब
आज पुकारते राह न मिले कोई जवाब
फिर भी चाहकर न हुए दूर दिल से
हुए मुफ्त बदनाम इस मुहब्बत से
क्या ख़ाक तो क्या सरेआम बे दिल से
आज मिली जैसे एक राहत गुबारे ए दिल से
हर बहता आंसु यूं पी के
वो हर राह को बीच में छोड़ के
जैसे बस उम्र तमाम जी के
आशियाना बनता यूं खुद तोड़ के
आज खुद ही चले ये जगह छोड़ के
रजनीश राय
०६/०९/२०२२
१३:३२