Tuesday, September 8, 2020

सब कुछ सिमट गया.. Post - 20

आसमान को धरती पे लाने की कोशिश में
यूँ धरती को खो दिया
कदम क्या उठे की
आसमान भी लुप्त हो गया...

जीवन रूपी इस पगडंडी पे कुछ समेटने की कोशिश में
रास्ते को ही खो दिया
कुछ कदम क्या बड़े हम आगे
पीछे सब कुछ सिमट गया....

क्या है ग़म और क्या है खुशी समझने की कोशिश में 
सब नजर अंदाज किया 
पल भर नेत्र किये बन्द
देखा ग़म ही गले लग गया... 

याद ना करेंगे यूँ एक नाकाम कोशिश में 
क्या देखा पलट वक़्त को 
आंसूओं नें जज्बाती कर दिया 
कुछ नाकाम कर दिया 
वक़्त को फिर आँखों संग रख दिया....

रजनीश राय 
©rajnishrai
07.09.2020
18:20 hours

Tuesday, April 14, 2020

आँखों की नमी... post ~ 19

आँखों की ओट से 
छुपे गर्म बूंद बनके
आने को बेताब से 
पर रुक जाते कुछ सोच के।।

हृदय दे ना साथ 
मस्तिष्क करे सवाल 
जीवन रूपी इस पगडंडी 
हम बहुत कुछ गए हार ।। 

क्या नाम दे इस दर्द को 
सोच के भी हो दर्द 
काश हम भी रो सके 
बेधड़क बेधड़क।। 

दिन चढ़ता रात उतरती 
आँख की नमी 
न होती कम 
न होती कम.....

Post : 19
रजनीश राय 
Written on : 14.04.2020 @ 20:30
©rajnishrai