सच्चे दिल की गहराइयाँ सा
बचपन था वह हसीं
बचपन था वह हसीं
खुशी जिधर तक दिखे जमीन
प्यार ममता का एक तोहफा
मातृ प्रेम सा लगे वह
या कुछ समांतर सा पाया
रिश्ते में परिभाषित बहन शब्द आया
हम चले वक्त चला
प्यार अठखेलियों में हर समां बंधा
रूठना मनाना कुछ सताना सब आया
शिक्षा चली संग संग
हर मौसम बहार एक नया त्यौहार आया
वक़्त किधर गया किधर आया
रिश्ते में परिभाषित बहन शब्द आया
हम दो भाइयों ने सबसे खूबसूरत
रक्षा बंधन पर्व पाया
वादा जो हम करते बहना से
सदा करेंगे रक्षा तुम्हारी
उलट सदा बहना ने वो वादा निभाया
रिश्ते में परिभाषित बहन शब्द आया
बेटी पराया धन
बहना पर भी यह मुहावरा आया
हुए हाथ पीले संग रची मेहँदी
खूबसूरत रूप में एक नेक इंसान
जीजाजी रूप में पाया
प्यार का यह अटूट बंधन
इतना है पावन शब्दों को बहुत कम पाया
वक़्त कुछ कदम आगे आया
प्यारा सा पुत्र और शरारत की मूरत
एक पुत्री को भगवन से
आशीर्वाद रूप में पाया
खुशियों का जहाँ सिर्फ
रिश्ते में परिभाषित बहना, बहू ,गृहणी और माँ
में सब का समावेश पाया
रिश्तों की डोर और मजबूत
वह नन्ही बहना वह प्यार का भंडार
कुछ भी न बदल पाया
आज भी अटखेलियों सा बचपन
हमेशा साथ पाया
किस्मत है हमारी प्यार स्वरुप
प्यार बहना का हमेशा संग पाया
रिश्ते में परिभाषित बहन शब्द आया