Friday, July 16, 2021
वो गया हो महक लुप्त यूं चंचल हवा में
Saturday, July 3, 2021
आपका स्वपन लेकर
आपका स्वपन लेकर ~ Post 22
मातृ प्रेम पर चन्द पंक्तियाँ लिख कर
सम्मान करें ममता या मातु प्रेम का
कुछ इस तरह सम्बोदित हुआ एक लेखन पर
हृदय उठी उमंग सोच इस गरिमा का
हाथ कलम ली सोच बचपन की
प्यार दुलार कभी गुस्सा कभी मार
खिलखिलाते उस बचपन के दिन चार
पूछते प्रश्न यूं बार बार
उत्तर मिले न चिड़न न गुस्सा एक बार
समय की गति निरतंर तेज हुए हम जवान
मातु प्रेम ममता या दुलार न मात्र कम हुआ आकार
किन्तु लिखते पंक्तियाँ रहे हाथ क्यों काँपकर
मातृ प्रेम का बोध विचार क्यों गए ह्रदय भेद कर
सच कहें या ह्रदय की सोच कुछ तो बोध लेकर
लगे वर्तमान के पन्नों को कुछ पढ़ने
ताना झगड़ना या मालूम नहीं की संज्ञा देकर
जिन हाथो ने दौड़ना सिखाया उन्हें छोड़कर
क्या लिखे मातु प्रेम पर लेख इस विराम को संग लेकर
कुछ हम न कर पाए पर दे ज्ञानं क्या सोचकर
प्रेम से जिन्हे प्रेम उन्हें कहें जीवन अति सूक्षम
जियें उस प्रेम को भी हमेशा
जो जीवन समर्पण सिर्फ आपको स्वपन लेकर .
सिर्फ आपका स्वपन लेकर। ...
रजनीश राय
15.07.2021