पहली मोहब्बत
या पहली बार धड़का दिल जोर
देखते उन्हे जब भी
जुबान पड़े कमज़ोर
कुछ कह पाते दिल की बात
लबों ही लबों में करते इकरार
दिल ही दिल रह गया अफसोस
आज तकते बन रास्ते
बस एक टक निहारते
आज चले जाते है सामने से
संग दोस्त हमारा यूं इतराता
दिया था भरोसा जिसे
इजहार ए इश्क
दिल ए जिगर को बताने का
प्यार करो तो हिम्मत भी रखना
इजहार करना तो खुद करना
कभी किसी दोस्त को न देना
है भरोसा गर इतना तो
भरोसा में खोने का गम न करना।
रजनीश राय
२१ नवंबर २०२१