शांत मन गुमसुम हो गया
दिल के जो था पास
बस कहीं गुम हो गया
हर खुशी हर ख्वाहिश
बस हाथ से छीन ले गया
जीवन का ध्येय
लक्ष्य हीन कर गया
यूँ लगे वो आस पास है
हटती नहीं जो एक आस है
सत्य पर झूठ का मोहपाश है
लगे झूठ एक अटूट विश्वास है
हर खुशी में एक याद बन रह गया
शांत था मन बस गुमसुम बन रह गया...
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रजनीश राय
Written 20.08.2018 @ 11:30pm
©rajnishrai