Monday, August 20, 2018

गुमसुम..... Post-16

शांत मन गुमसुम हो गया
दिल के जो था पास
बस कहीं गुम हो गया
हर खुशी हर ख्वाहिश
बस हाथ से छीन ले गया
जीवन का ध्येय
लक्ष्य हीन कर गया

यूँ लगे वो आस पास है
हटती नहीं जो एक आस है
सत्य पर झूठ का मोहपाश है
लगे झूठ एक अटूट विश्वास है

हर खुशी में एक याद बन रह गया
शांत था मन बस गुमसुम बन रह गया...

Post-16
रजनीश राय
Written 20.08.2018  @ 11:30pm
©rajnishrai

Wednesday, August 15, 2018

ग्रहण..... Post-15

कुछ सोचा लिखें ली कलम हाथ
आस के प्रवाह यूं निराशा हुई साथ
संग थे कईं रँग कईं हर पल साथ
हसीं थी कहीं खुशियाँ थी खास
जीवन गति न अवरोध न खट्टास
समय बदला लगा यूं कोई मजाक

कम हुई खुशियाँ ग्रहण हो कोई
हाथ की लकीरें कहें यूं अनजान कोई
दिशा बदल यूं अंचभित हुई
ह्रदय हुआ अनजान न जाने कोई

अनेक सवाल न मिले जवाब कोई
लुप्त हुआ सुर्य अंधकार में कहीं
समाप्तः हुई लहरें समंदर में कहीं
रुकी यूं हवा सहमा हो कोई
आँख कहे अब नीर न शेष कोई

सब है साथ पर तुम सा न कोई
यादें है बस साथ जैसे परछाई कोई 
संग थे जो अपने न जाने रहते है कहीं
आस की दिखे या मिले
बस एक बार वो मासूम चेहरा कहीं

Post - 15
Written : 14.08.2018  12:50 pm
रजनीश राय
©rajnishrai

Saturday, August 11, 2018

सोचते हर पल.. Post - 14

सोंचते हर पल
क्या चाह रहे थे हम
वक़्त किधर निकला
अच्छे वक़्त के इंतज़ार में
बुरा वक़्त सब कुछ ले निकला
खमोश हुई सब राहें
जहां से कभी बेप्रवाह हर बार निकला
उम्मीद की हर कड़ी में
सब कुछ बिखरा निकला
इतनी खुशी ना चाह हमे
पर दुख बेहिसाब निकला..

Post 14
Written : 11.08.2018
रजनीश राय
©rajnishrai