Saturday, July 3, 2021

आपका स्वपन लेकर

आपका स्वपन लेकर ~ Post 22

 

मातृ प्रेम पर चन्द पंक्तियाँ लिख कर 

सम्मान करें ममता या मातु प्रेम का

कुछ इस तरह सम्बोदित हुआ एक लेखन पर 

हृदय उठी उमंग सोच इस गरिमा का 

हाथ कलम ली सोच बचपन की 

प्यार दुलार कभी गुस्सा कभी मार 

खिलखिलाते उस बचपन के दिन चार 

पूछते प्रश्न यूं बार बार 

उत्तर मिले न चिड़न न गुस्सा एक बार

समय की गति निरतंर तेज हुए हम जवान 

मातु प्रेम ममता या दुलार न मात्र कम हुआ आकार 

किन्तु लिखते पंक्तियाँ रहे हाथ क्यों काँपकर

मातृ प्रेम का बोध विचार क्यों गए ह्रदय भेद कर  

सच कहें या ह्रदय की सोच कुछ तो बोध लेकर 

लगे वर्तमान के पन्नों को कुछ पढ़ने 

ताना झगड़ना या मालूम नहीं की संज्ञा देकर 

जिन हाथो ने दौड़ना सिखाया उन्हें छोड़कर

क्या लिखे मातु प्रेम पर लेख इस विराम को संग लेकर 

कुछ हम न कर पाए पर दे ज्ञानं क्या सोचकर 

प्रेम से जिन्हे प्रेम उन्हें कहें जीवन अति सूक्षम 

जियें उस प्रेम को भी हमेशा 

जो जीवन समर्पण सिर्फ आपको स्वपन लेकर .

सिर्फ आपका स्वपन लेकर। ...


रजनीश राय

15.07.2021


 

 

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