Monday, January 3, 2022

ये सुबह और संग प्यार की चाय - ek cup chai ya coffee

वो चिड़ियों की चहचहाट 
संग धुप की किरणें 
आना छुप परदे की ओट 
ओस की बुँदे का फिसलन
खिड़की के कांच  
संग शीत लहर की सरसराहट  

आज इतवार बेखबर नींद भी 
स्वपन में आज सिर्फ प्यार ही 
नींद को उड़ाती खुले बालों की खुशबू 
संग दूर आवाज पायल की 
अँखियों को भींचे देख हुए चंचल 
आती प्याली चाय उनके हाथ की 

देखा जो उनको सामने 
आये आँखों संग समय के पैमाने 
न जाने कितने मौसम बदले 
कभी आजमाइश वक्त से 
वह हर लम्हे प्यारे 
दुआ करें बदले कभी न 
उनके प्रति हर वचन हमारे 

ये सुबह और संग प्यार की चाय 
ख़ुशी के पल मोहब्बत के साये 
नज़र न लगे खुद की ही न कभी 
चाहे लाख जले हमसे दुनिंया सभी 

रजनीश राय 
२४/१२/२०२१ 
१९:५५ 

चाय और तुम 

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