ह्रदय वेदन। ...
कराहता दिन निकला बीती दर्द में साँझ।
कराहता दिन निकला बीती दर्द में साँझ।
सूर्य चला अस्त को अंधकार सौंप सब काम।
आँख हुई नम देख हुआ हृदय परेशान।
रात्रि आँख रोये सुबह तक न करे आराम।
सोचते क्योँ समय लाया एक चौराहे गुमनाम।
पल पल हृदय पूछे क्या हुआ कुछ अपराध अनजान।
खुशियाँ सिर्फ मांगी न माँगा जग तमाम।
हर क्षण उदासी मिली या ह्रदय परेशान।
नयन तकते है जिन्हे चले किस धाम।
प्रत्येक पंछी घर लौटे संध्या कर कार्य तमाम।
जब आये घर अपने लगे सब अशांत।
पर अपने न आये तकते नयन सुबह शाम।
सब चेहरे कुछ ढूंढे कहते यह नयन अंजान
खुशियाँ सिर्फ मांगी न माँगा जग तमाम।
हर क्षण उदासी मिली या ह्रदय परेशान।
नयन तकते है जिन्हे चले किस धाम।
प्रत्येक पंछी घर लौटे संध्या कर कार्य तमाम।
जब आये घर अपने लगे सब अशांत।
पर अपने न आये तकते नयन सुबह शाम।
सब चेहरे कुछ ढूंढे कहते यह नयन अंजान
स्वपन नहीं दुस्वपन सच्चाई अब तो कहा मान।
वर्तमान को न माने सत्य यह ह्रदय अनजान
प्रत्येक प्रसनता अस्त हुई यूं जीवन निष्प्राण।
अशांति की चादर ओढे निकले उम्र तमाम
उम्र तमाम सब अशांत, अशांत। ....
रजनीश राय
१५ जून २०१८
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