सोंचते हर पल
क्या चाह रहे थे हम
वक़्त किधर निकला
अच्छे वक़्त के इंतज़ार में
बुरा वक़्त सब कुछ ले निकला
खमोश हुई सब राहें
जहां से कभी बेप्रवाह हर बार निकला
उम्मीद की हर कड़ी में
सब कुछ बिखरा निकला
इतनी खुशी ना चाह हमे
पर दुख बेहिसाब निकला..
Post 14
Written : 11.08.2018
रजनीश राय
©rajnishrai
No comments:
Post a Comment