ख्वाबों की लंबी उड़ान ...
हुआ शुरू जब खेल इज़हार का
बैठे सोचते हम प्यार की मिठास को
हाथ ली कलम लिखने अपने खास को
यूं कलम लिए सोचते
क्या लिखे हजूर कोकुछ लिखते बनता ही नहीं
यादें ही यादें दिल की गहराईयों में
जिन्हे याद किए बगैर दिल क्यों थमता नहीं
पर यादों के सहारे समय कटता नही
फिर सोचते दिल तो है तुम्हारे पास
किसी को दिया नहीं
चाहे लाख कहो पास नहीं है तुम्हारे
है हमारे पास भी तो नहीं
इश्क का मर्ज है ही ऐसा
साथ रह कर भी लगे तुम पास नहीं
दूर रहे तो लगे शायद तुम आस पास कहीं
ख्वाबों की ऐसी लंबी उड़ान
किसी के पास नहीं
किसी के पास नहीं।।।
रजनीश राय
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