Tuesday, October 5, 2021

मोहपाश - The Black holes of our Society

भ्रम रहे हर पल 
आवाज आयी दूर पायल की 
कभी लगे 
खनकनाती उसकी हसीं पास की 
हो एहसास कभी 
फिज़ा में खुश्बू हमारे प्यार की 
चलती हवा की थरथरात  कहे 
शायद गया पास से अभी कोई  
आंखे भी तकती हर परछाई 
आया कोई अपना सा कहीं  

कब तक रहे इस मोहपाश में 
आगे तो जरा रखो कदम 
आज मन में ठान  
करेंगे दिल का इजहार हम

दिन आया शाम ढलने का वक़्त 
देखें उन्हें उधर से आते एक टक 
हिम्मत करके कदम आगे बढ़ाया 
पास पहुंचे जब उनके हम 
उनको प्रतिक्रिया वंचित पाया 
काँच सा पार होते उनको पाया 
हाथ हवा में 
पर कुछ छु न पाया 

तभी कुछ लोगो का डरता सा 
इस जगह से तेज चलने पर 
कुछ वार्तालाप सुन पाया 
सुनते हुआ सब मोह भंग 
आँखों में तैरते असंख्य गम 
कानो में गिरे जैसे मोम गरम 
दिल भी अब गया पूर्ण सहम 

अच्छा था वह जवान किसकी लगी नज़र 
जो यहाँ पर अनजान सा मृत पाया 
सुना है आज आज भी वह प्रेत बन इस राह 
अपनी प्रियंका को खोजते भटकते पाया 
जातिवाद की भेट या सभ्य समाज 
कहने वालों के नाम खुद की बलि चढ़ा आया 

न जाने जातिवाद कितनो को निगला 
समाज बदला पर इंसान न बदला  
जातिवाद धब्बा समाज का 
सोच गर बदली आज भी बदला 
इंसान बदला तो पूर्ण समाज बदला 

विनती है पूर्ण समाज से 
ऐसे न बांटो धर्म, जाति, समाज में हर इंसान को 
इंसान बन जन्म लिया संसार में 
तो क्यों न हो हर अधिकार इंसान को 


रजनीश राय 
०५ अक्टूबर २०२१ 




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