Tuesday, October 5, 2021

इंसान रूप में जन्मे बस इंसान ही रहना - The Black holes of our Society

खुशी का वह पल अरमानो संग आया 
जिधर देख्ने  हँसता हर एक समां  पाया 
यार दोस्त लगाते ठहाकों की उठती गूंज 
खिलखिलाते बच्चों के चेहरों पर महकता नूर 

साथियों यहाँ से पढ़ना हो गंभीर 
क्या क्या होता कभी ऐसे भी 
ये हम सबको जानना जरूर 

शादी दोस्त की 
हम भी बारातियों संग शुमार 
रात का वक्त शोर बारात का 
देख इक शक्श ने शर्मदिंगी को किया तार तार 
आज सोच कर भी हाथ पैरों में कम्पन आये बार बार 
बालिका उम्र सिर्फ ५  या ७  की 
दे चॉकलेट पास बुलाया 
अंधरे कमरे और बारात के शोर में 
हवस का शिकार बन रूह को भी रुलाया 
इंसानियत को कलंकित कहलाया 
कोसे खुद को आज हम 
आदम रूप में क्यों जनम पाया 

आज लिखते उस दुखद वाक्य को 
माँ बाप का वह दर्द वह रोता चेहरा 
एक एक क्षण कोसते दर्द जुबां पर आये 
माँ, बहन, स्त्री, फिर बेटी कितने रूप पाए 
बालिका भगवन रूप भी कहलाये 
नादान बालिका क्या दोष की सजा  
या बालिका रूप में जनम लेना अभिशापित कहलाये 

दो दिन कैंडल रूपी प्रदर्शन, चार दिन संगठन प्रदर्शन 
या राजनयिक  प्रदर्शन नहीं है करना
परिवर्तन के रूप में आने वाले नौजवान और 
एक एक बालक को इस शैतानी प्रवृत्ति से दूरी है बनाना
घर से ही शुरू कर इस अध्याय को सब तक है पहुंचाना 

विनीति है सबसे इंसान रूप में जन्मे बस इंसान ही रहना 
समाज में ऐसी शैतान परिवर्ती को कभी क्षमा न करना 
बाल शोषण के इस रुद्र रूप या 
दूसरे रूप को समाज में न पनाह न ही पनपने देना 
बाल शौषण को सदा के लिए समाज से मुक्त है करना। .. 

रजनीश राय 
३० सितम्बर २०२१ 
 

No comments:

Post a Comment