यादें गहरा जाती हैं
गर्म बूंदों सी
आंखो के कोने से
बन आंसू बह जाती है
न करेंगे उजागर ये गम
इसलिए यादें अंदर दफना रखी है
आज हर खुशी में भी
वो दुख कहीं छुपा रखा है
हो न कभी कोई
देख हमे उदास
बस एक ऐसा मन बना रखा है
दुख को कहीं दूर छुपा रखा है
एक एक दिन
एक एक पल सब है
आज भी संग यादों का काफ़िला
रहेंगे हम ही सिर्फ संग
न देने कभी उदासी की कोई भनक
दिल को मज़बूत बना रखा है
दुख को कहीं दूर छुपा रखा है
रास्ता है बहुत लंबा
हर पल को क्यों कोसे
जब गम को दिल में छुपा रखा है
हर पल बीतते क्या रात क्या दिन
हम लाए न जाने कितने दिन
खुद को भी कुछ यूं समझा रखा है
दुख को कहीं दूर छुपा रखा है
No comments:
Post a Comment