Tuesday, August 9, 2022

दुआ करते है - Unsaid Feelings

दुआ करते हैं

गलियारे प्रेम के एहसास से 
कुछ अपनेपन की मिठास से 
यादों के झूलों से
बैठे बिन पतवार वाली नाव पर 
गए जब वह पास से कुछ मुस्करा के 

ख़्वाबों की दुनिया 
बहके हर कदम 
मासूम से उस चेहरे पर 
वह नज़र चुराती हर नज़र पर 
चलना मदमस्त सा
हिरण की चाल पर 
बालों की वह घुँघराली लट  
गिरना नयनों के प्यालों पर 
भरी दुपहर दुपट्टा सर पर 
नंगे पाँव भागना गलियारे के गर्म पत्थरों पर 
ठहरे पानी में कूदना बुँदे उड़ती हवा में लहराकर 
क्या कहते इस प्यास को हम न समझ पाए 

शाम ढली हम चले 
आज मिलने अपने प्यार को 
उसको पाकर सामने  
हम भी कुछ मुस्कराये 
न जाने कितने सपनों को सँजो लाये 

शिकवा करते यूं 
हम रात की तन्हाई को
शाम सिर्फ अपनी हो 
चांद का भी पहरा न हो
तारो न गिरना कसम है 
कहीं कोई मांग ले न तुमको
इस भय में समय गुजारते गए

सदियों के सपने सच हो पाए
वो मुस्कराहट को अपना कह गए
सोचा था जिसे सदैव सपनों में
आज अपने हो गए 

वक्त लगा उड़ने लगा कर पंख 
उसके हाथ का वही कोमल स्पर्श 
आज भी सदैव अपने कंधों के संग 
वक्त न जाने कितना आया आगे  
परन्तु हम न आगे जाते है 
न आगे जाना चाहते हैं
वह प्यार वह मिठास संग हवा में घोल 
आज भी सिर्फ मोहब्बत में जीना जाते है 
दुआ है अब तो यही तुमसे ए रब 
न करना कभी हमे जुदा 
बुलाना हो गर कभी 
दोनों को संग ही ले चलना ख़ुदा 

रजनीश राय 
०९/०८/२०२२ 
१७:२२ 

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