Saturday, July 30, 2022

मुसीबते ऐ दौर - Mere Humrahi

दिन नया रात नयी  
वक्त चले अपनी गति 

आया एक ऐसा दिन 
लगे सब गया छिन्न 
दरार पड़ी कुछ मीठे रिश्तो में 
हम भी जा बटे कुछ हिस्सों में 

संग खड़े हमदम 
सूझ बुझ के संग 
हाथ से पकड़ हाथ 
संग किया मुसीबते ऐ दौर पार 

नया शहर नया घर 
नयी नौकरी ढूंढ 
जीविका को समृद बनाते 
मेहनत से न कदम डगमगाए 
खुशियों की रूप रेखा फिर सजाये 

फिर आया ख़ुशी का दिन 
बहुत मुद्दतों के बाद 
महकता सूरज सा नन्हा कदम 
घर आंगन किलकारी की गूंज 
प्रतीत एक सुकून 
समय भागे सरपट सरपट 
हर पल महकता फूलों सा 
कानो में आये जैसे मधुर कोई धुन 

बाल की शिक्षा का पहला अध्याय 
संग माँ का प्यार पाए 
पुत्री और पत्नी का धर्म संग निभाए 
हम हर पल उनको संग पाए 

कदम बड़े कुछ इस जीवन रूपी बंधन में
प्यार होता है क्या जाना कुछ ही लफ्ज़ों में

रजनीश राय 
१३/०५/२०२२ 
१८:०० 

No comments:

Post a Comment