Thursday, January 12, 2023

कोई उम्र नहीं होती * Dream

शायद जीने की कोई वजह न होती
गर सपनों की कोई सीमा नहीं होती
एक छुपी हुई आशा जैसे उम्र भर
पूरी नहीं होती

आज सपनों के मध्य खड़े हर कोई
जैसे सागर की कोई सीमा नहीं होती
फिसलता हर लम्हा हाथ से रेत की तरह
वक्त की कमी पूरी नहीं होती

भागता दौड़ता हर एक शख्स 
नेत्र किए बंद जैसे एक होड़ हो कोई
न कोई खुशी न अपनेपन की चाहत 
पर लगाव की कोई कीमत तो नहीं होती

सपने प्रतिबिंब परछाई के
हम चले कदम जितने
वो संग नही बस और आगे चले जाते है
जैसे थोड़ी सी जगह में
बड़ा सा घर बनाते की चाह रखते है
मन में जोश दिल में एहसास
चांद सूरज की चाह
अथाह सागर की गहराइयां
अतः बन परछाइयां
सदैव कदमों से रह जाती दूरियां

करो ना कैद खुद को सपनो में इतना
अपनो में ढूंढो हर एक सपना
वर्तमान को लो अपना मान
क्योंकि हसीन वक्त की यारो
कोई उम्र नहीं होती

रजनीश राय
१२/११/२०२२
१९:५३

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