Monday, January 16, 2023

मन को एकाग्र करें कैसे - jhooti muskharat

चेहरे पर थकान झूठी हंसी लिए संग 
कुछ पास रहकर भी दूर हो गए जैसे
आंखों में उम्मीद आस का दामन छोड़ 
रास्ता पहचाना सा भूल गया हो जैसे
इस भाग दौड़ भरे जीवन में
राह समीप पर गंतव्य दूर हो गए जैसे
सिर्फ अशांति है हर दिशा
मन को एकाग्र करें कैसे

अपने जहां अपनों को नहीं पहचानते
पराए बन कर जो आज हमको नहीं जानते
विश्वास का चोला ओढ़कर आए न जाने कहीं
फिर पहचान को पहचान से मिलाए कैसे
सिर्फ अशांति है हर दिशा
मन को एकाग्र करें कैसे

जलती हैं आंखे धूप के ताप से
कभी पक्की सड़क कभी किनारे से
वृक्ष की छाया भी लुप्त हो गईं जैसे
कटती है उम्र सिर्फ एक सोच पे कहीं 
हंसते है सिर्फ कुछ हंसी यादों पे कहीं
कोई क़रीब या दूर सब बेमतलब लगे यूंही 
अशांत है मन अशांत हर दिशा
इस मन को करे तो एकाग्र करें कैसे

रजनीश राय
२१/१०/२०२२
१७:३०

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