Wednesday, January 25, 2023

दिल ए सब्र - Suppressed Inklings

पास आकर भी बहुत दूर हुए
आज वो जख्म नासूर हुए
जिनके तसव्वुर में हम मशहूर हुए
आज हम यूं खुद से बेबस मजबूर हुए 

राज क्या हुए उनके बेनकाब
फेरहिस्त बेहिसाब 
दिल ए सब्र मिला सिला लाज़वाब 
आज पुकारते राह न मिले कोई जवाब

फिर भी चाहकर न हुए दूर दिल से
हुए मुफ्त बदनाम इस मुहब्बत से
क्या ख़ाक तो क्या सरेआम बे दिल से
आज मिली जैसे एक राहत गुबारे ए दिल से

हर बहता आंसु यूं पी के
वो हर राह को बीच में छोड़ के
जैसे बस उम्र तमाम जी के
आशियाना बनता यूं खुद तोड़ के 
आज खुद ही चले ये जगह छोड़ के

रजनीश राय
०६/०९/२०२२
१३:३२

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