Saturday, May 5, 2018

एक सीधी जीवन रेखा की व्यथा । ....... Post-4

कभी न समाप्तः होने वाली। ......... पिता की व्यथा (ऋषब)
एक सीधी जीवन रेखा की व्यथा । .......  

यूँ आया सन्देश की कर गया पिता को मौन।
समझ न आये प्रथम की कौन दिशा है हम।
झटपट सब कुछ छोड़ कर एक गति ली थाम।
रस्ता हुआ यूं लम्बा न हमें लगा पहचान।
मस्तिष्क में लगी प्रश्नों की एक कतार तमाम।
उत्तर पाने को दिल में थे कितने ही तूफ़ान।
न रब को न खुदा को न भूला कोई भगवान्।
अंजाम हो अच्छा दिल में बस एक अरमान।
पसीने में तरबतर यूं पहुंचा किसी तरह अंजाम।
एक जवान बेटे को देखा, माँ गोदी ले प्यार से थाम।
भगदड़ सी मची ले चलो ले चलो वक़्त हे कम।
पिता संग हो चला माँ लिया प्यार गर्दन को थाम।
यूं पहुंचे अस्पताल में यंत्रो में ढूंढ़ने को प्राण।
पुत्र जीवन संघर्ष, पिता खोजता यंत्र यंत्र आस के अरमां।
हर एक क्षण जाता देख हो जाता परेशान।
हर सीधी रेखा यंत्र की करनी लगी बेचैन।
आस लगा पिता देखता हर भगवन पे नैन।
प्राण पखेरू यूं कहने लगे वह यंत्र तमाम।
जीवन ज्योति एक सीधी रेखा पिता सोचता एक नादान।
सच को बस सच कहे यह अंश्रु अनजान।
जीवन ज्योति है एक सीधी रेखा जान लो अनजान, जान तो अनजान। ....

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