Saturday, May 26, 2018

खुशियां की चाह ग़म सौगात में ... Post-10

ह्रदय वेदन। ......
खुशियां की चाह ग़म सौगात में 

खोखले हुए दरख्त कभी थे हँसते हवा के झोके से।
एक तूफ़ान आया सब करा धूमिल क्षण में धोखे से।
यूं टूटे एक एक मोती कण माला के गर खींचने से।
हर पल डर की सौगात मिली बस अपनों से। 
खुशियों ने राह बदली हम ठहरे अंचभित से।
था एक अपना गर किधर गया तकते हर दिशा से।
हर दिशा कहने लगी कुछ न गुजरा इधर से।
सब कुछ हुआ यूं शांत डरने लगे खुद आप से।
जीना है या बस जीना हम असमंजस से।   
प्रति आहट लगे अब आहत सी।
हर अंधकार बस राहत सी। 

राह करे परेशां वक़्त आजमईश में।
खुशियाँ हँसे हम पे तन्हाईयाँ भी साथ में।
क्या साथ लाये थे क्या है साथ में।
खुशियां की चाह ग़म सौगात में। .........

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