भूल कर भी याद रहने वाली । ......... एक व्यथा माँ की (ऋषब)
आज हम सब में होता, सब में होता। ...
जिद पे आना अच्छा लगे।
घर छोड़ना गर अच्छा लगे।
मित्रो संग रह लेता।
कोई प्यार गर अच्छा लगे।
कोई बंधन सा अपना लगे।
प्यार को अपना लेता।
आज हम सब में होता, सब में होता। ...
जिद पे आना अच्छा लगे।
घर छोड़ना गर अच्छा लगे।
मित्रो संग रह लेता।
कोई प्यार गर अच्छा लगे।
कोई बंधन सा अपना लगे।
प्यार को अपना लेता।
सोचता कुछ यूं ह्रदय मेरा ।
माँ गर एक सूरत मिलता रहता।
जीवन पृष्ठ अंकित रहता।
अश्रु न जीवन अमृत होता।
जीवन सरल न कठिन होता।
माँ ममता कितनी कठिन।
एक ह्रदय अंकित कर लेता।
मस्तिष्क कुछ जवळीत था।
अश्रु सूरत माँ मोहित होता।
क्यूँ न सोचा यह प्राण माँ एक जान।
कितना कठिन यूं जीवन तमाम।
अंतिम नेत्र माँ को देखा।
फिर लिया जल एक बूँद तमाम।
नेत्र तकते दृशय अनजान।
कुछ यह होता कुछ वह होता।
नादान परिंदें। .........
आज हम सब में होता, सब में होता। ...
माँ गर एक सूरत मिलता रहता।
जीवन पृष्ठ अंकित रहता।
अश्रु न जीवन अमृत होता।
जीवन सरल न कठिन होता।
माँ ममता कितनी कठिन।
एक ह्रदय अंकित कर लेता।
मस्तिष्क कुछ जवळीत था।
अश्रु सूरत माँ मोहित होता।
क्यूँ न सोचा यह प्राण माँ एक जान।
कितना कठिन यूं जीवन तमाम।
अंतिम नेत्र माँ को देखा।
फिर लिया जल एक बूँद तमाम।
नेत्र तकते दृशय अनजान।
कुछ यह होता कुछ वह होता।
नादान परिंदें। .........
आज हम सब में होता, सब में होता। ...

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