ह्रदय वेदन (ऋषब )
हर दिशा बस मौन है, मौन है। .........
मार्मिक दृश्य या वक़्त का अट्टास।
अंधकार आँगन में बुझी हर आस।
मन के प्रिय जिन में जिए बने अतीत।
हर जग जीत के सब लगे पराजित।
अजब सी शांति यूं लगे स्पर्धा शोर से।
खामोश वक़्त की सुईं चले कमजोर से।
आज एक राह पे हम खड़े मजबुर है।
किस मोड़ मुड़ना सोच प्रति सोच है।
होगा स्वपन प्रति क्षण एक नयी सोच है।
किन्तु स्वपन से बाहर की न कोई डोर है।
ह्रदय कहना लगा न मुझमे अब जोर है।
आंसू भी करे शिकायत हम ह्रदय कमजोर है।
मस्तिष्क कोशिकाएं रक्त विभोर है।
क्या है रक्त या नीर जो कमजोर है।
प्रति क्षण मांगी यही आशीष।
दुस्वपन न लाये दुश्मन या हितैषी।
परीक्षा लेते भगवन मत बुद्धिजीव का।
परीक्षा हारे जीते आज पल अतीत का।
आरम्भ गति स्थिर हुआ जीवन।
जीवन गति अति मद्धम।
और हर दिशा बस मौन है, मौन है। .........
हर दिशा बस मौन है, मौन है। .........
मार्मिक दृश्य या वक़्त का अट्टास।
अंधकार आँगन में बुझी हर आस।
मन के प्रिय जिन में जिए बने अतीत।
हर जग जीत के सब लगे पराजित।
अजब सी शांति यूं लगे स्पर्धा शोर से।
खामोश वक़्त की सुईं चले कमजोर से।
आज एक राह पे हम खड़े मजबुर है।
किस मोड़ मुड़ना सोच प्रति सोच है।
होगा स्वपन प्रति क्षण एक नयी सोच है।
किन्तु स्वपन से बाहर की न कोई डोर है।
ह्रदय कहना लगा न मुझमे अब जोर है।
आंसू भी करे शिकायत हम ह्रदय कमजोर है।
मस्तिष्क कोशिकाएं रक्त विभोर है।
क्या है रक्त या नीर जो कमजोर है।
प्रति क्षण मांगी यही आशीष।
दुस्वपन न लाये दुश्मन या हितैषी।
परीक्षा लेते भगवन मत बुद्धिजीव का।
परीक्षा हारे जीते आज पल अतीत का।
आरम्भ गति स्थिर हुआ जीवन।
जीवन गति अति मद्धम।
और हर दिशा बस मौन है, मौन है। .........
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