चंद वाक्यां दोस्ती के
दोस्ती के पल जी लो हर घड़ी
क्या पता किस रोज़ जाना है बिछड़
चंद लम्हात कब सिमट जाएं
कौन जाने किस मंजिल को पाना है
आसमां के तारे ले आओ जमीन पर
गर मिले एक मुस्कुराहट बदले में
खुशियों की बदौलत ही
हर दोस्ती की कीमत चुकाना है
हर सुख दुख की पहचान सिर्फ दोस्ती
हर चेहरे की मुस्कान सिर्फ दोस्ती
न लेना दिल पर रूठे हो गर अपने
दोस्ती संग अक्सर नादानी निभानी पढ़ती है
जिंदगानी में अक्सर दोस्ती नाक़ाम होती है
होते है दोस्त सच्चे
पर न जाने क्यों दोस्ती
अक्सर बदनाम होती होती है। ..
रजनीश राय
०९/०८/२०२२
१४:५१
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