Friday, October 21, 2022

चंद वाक्यां दोस्ती के - The Resplendence of Friendship

चंद वाक्यां दोस्ती के 

दोस्ती के पल जी लो हर घड़ी
क्या पता किस रोज़ जाना है बिछड़
चंद लम्हात कब सिमट जाएं 
कौन जाने किस मंजिल को पाना है

आसमां के तारे ले आओ जमीन पर
गर मिले एक मुस्कुराहट बदले में
खुशियों की बदौलत ही
हर दोस्ती की कीमत चुकाना है 

हर सुख दुख की पहचान सिर्फ दोस्ती
हर चेहरे की मुस्कान सिर्फ दोस्ती
न लेना दिल पर रूठे हो गर अपने
दोस्ती संग अक्सर नादानी निभानी पढ़ती है

जिंदगानी में अक्सर दोस्ती नाक़ाम होती है 
होते है दोस्त सच्चे 
पर न जाने क्यों दोस्ती 
अक्सर बदनाम होती होती है। .. 

रजनीश राय 
०९/०८/२०२२ 
१४:५१ 

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