Friday, October 21, 2022

ग़लत नहीं है - The Resplendence of Friendship

आज बैठे थे कुछ और लिखने 
की सहसा एक एहसास आया 
बात चली मित्रता की आज 
नारी और पुरुष पे सवाल आया 
मित्रता के है इतने दायरे 
समाज इस को कभी न समझ पाया 

नारी पुरुष की मित्रता को 
अधूरी कल्पना सा 
अतृप्त इच्छा के रूप सा 
वासनाएँ छुपाने के नक़ाब सा 
संबध को ढकने के प्रयास सा 
सिमित सोच में बंधा पाया 

मित्रता के रूप हज़ार  
पुरुष और नारी संग दोस्ती 
आज समाज का महत्वपूर्ण अंग 
हर कदम जब नारी संग 
क्यों मित्रता पर हो तंज 
हर क़दम लो सबका साथ
समाज,और देश सब का हो विकास 
अब आना इस मानसिकता से बाहर 
कर इस सामाजिक त्रुटि का बहिष्कार 

इस सामाजिक कुरूप सोच को 
सिर्फ मित्रता समझने का वक्त आया 
इस रूढ़िवादी विचार को 
अलविदा कहने का समय आया 
स्वस्थ मैत्री और सिर्फ स्वस्थ सोच 
समझने का अवसर आया 

आज कहने का साहस किया मैंने 
शायद कल्पना तो करते होंगे सभी 
ग़लत नहीं है  
बोलने का उचित वक़्त आया 

रजनीश राय 
१६/०८/२०२२ 
२०:०४ 



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