Friday, October 21, 2022

कुछ याद आया होता - The Resplendence of Friendship

क्यों जिंदगी हर हसीन पल को नहीं दोहराती
याद आज भी है कहकशों के पल
पर न जाने क्यूं आज आंखें नम 
जेहन में उदासी न होती कम
वो दोस्ती के लम्हात की जब जब याद आती 

वक्त के भंवर में खो गए से लगते है सब
हर बात लगे अब हुई पराई 
मोड़ भी हुए हरजाई
रास्ते हुए लंबे
हर लम्हे यादों के बन परिंदे
न जाने किस दिशा 
या बन घनघोर काले बादलों में हुए लुप्त

किसी न किसी को तो कुछ याद आया होता
वो खुशियों के मेले संग पुराना एतबार
दीवानगी को ले संग, बंदिशों से पार
कुछ तो यादों में उनके कभी आया होता

हर वक़्त सिर्फ एक प्रश्न न अब भुलाया जाता 
क्या पास रह कर भी कोई रहता यादों में
या कुछ दूर रह कर भी न भुलाए जाता..

रजनीश राय 
०२/०८/२०२२
१९:११

No comments:

Post a Comment