Thursday, July 21, 2022

आजाद पंछी सा - Atamvishwas

हुआ समापन विद्यालय अंश का 
प्रसन्न ह्रदय उल्लास में, खुशियां ऐसी की छुपे न छुपे 
मुक्ति विद्यालय पोशाक से, होगा संग नए दोस्तों का 

यूं होगा एक अलग समां, आजाद पंछी सा प्रतीत 
सोच कर ही मन हो प्रफुल्लित, बजे वाद्य दिल में अनगणित 
पहला दिन कदम कॉलेज में, तकते गलियारे असमंजस  
आयी आवाज एक पीछे से जोरदार, पाँव रुके असंख्य विचार 

पलट देखा पाया वरिष्ठ छात्रों को 
इशारा करते हाथ से पास बुलाया 
हम डरे सहमे आवाज में कम्पन 
क्या है माजरा कुछ समझ न आया 

क्या नाम क्या जाति, क्या शौंक कितना है ज्ञान
हम भौच्चके से बस सोचते सुन यूं प्रश्नों की कतार तमाम 

नहीं है पता तो इधर आइये, सामने आती छात्रओं से 
माफ़ी मांग कर बताइये, नहीं मिली गर माफ़ी तो 
सजा के पात्र बन जाइये 

हम ने सोचा चलो क्या कसूर 
जो हम डरे, क्यों न माफ़ी मांग 
इस दुविद्या को करें दूर  
मुस्कुराते आती छात्राओं को 
किया अभिवादन संग माफ़ी मांग  
जवाब में गुस्से में दुत्कारा हमे
हम देखते शर्मसार, कभी उनको तो कभी दोस्तों को  
५ दफा पांचवी मंजिल की सजा की याद करती पसीने में तरबतर 

हम चले कक्षा में, मुख पे अनजाने भाव 
हँसता हर एक चेहरा, हालत देखकर 
आये घर कमरे में खुद को एक कोने में समेट कर 
लगा बहुत समय खुद को वापस पाने की जंग 
कहीं ऐसे छात्र भी जो हुए आत्महत्या के संग 

सोचते हम क्या है यह सजा, क्या अपराध किये हम 
शिक्षा के लिए विद्यालय से, क्यों रुख महाविद्यालय का किये हम 

विनती आज के वरिष्ठ छात्रों से, ये खेल रैगिंग का करो बंद 
शिक्षा का केंद्र है विद्यालय, रहने दो इसे सिर्फ शिक्षा का केंद्र 


रजनीश राय 
१५/१२/२०२१ 
१९:१७ 

No comments:

Post a Comment