Thursday, July 21, 2022

सर्द परदे आंखो के # आत्मविश्वास

दोष नहीं पर्दा ही इन आंखों पे सर्द है 
रहते है महफूज साए हिंदुस्तान में 
दुखी दिखें हर पल खुश दूसरों के साए में
दोष देते हर पल जिन्हे
वो देश की उन्नति के सहाय है

कोई किसी का गुलाम नहीं होता
भारतवर्ष में कोई हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई नहीं होता
गुजराती बिहारी पंजाबी या तमिलियन नहीं होता
होता है तो सिर्फ भारतवासी होता है
आज है हम महफूज बनो शुक्रगुजार खुदा के
उसका कोई भी इंसान एक दूसरे से जुदा नहीं होता

मुद्दा नहीं काले धन का
या कोई घराने की ऊंचाई का
हम हुए कितने मुफ्तखोर 
आज इस की भरपाई का
न जाने कितने वादे मुफ्त के
पर मुफ्त नहीं संग मेहनत के ही लेंगे
बस अंदर के इस लोभ को मिटाना है

कौन नहीं चोर ये कहते है हम
गर एक उंगली उनकी तरफ तो चार उंगली पे है हम
पैसा न आया ना साथ जायेगा
रहो बस एक हो कर सब 
यही सबक मुदत्तों तक दोहराया जायेगा,,

अब बस करें जीना भूतकाल में
वर्तमान और भविष्य में है बस जीना
इसे कहो चाहे मेरा स्वार्थ या आपका नफा
लिख तो रहा हूं पर गवाह है 
गूंजती कान में अजान की सुरमई पक्तियां
वक्त से वक्त मिला लो यारो 
झूठ से न है दूर की नजदिक्यां

खुद पे रखो विश्वास 
भारत को समृद्ध बनाना है
एक एक इंसान के अंदर आत्मविश्वास जगाना है
अपने मुल्क के हर इंसान को अपने अंदर बसाना है
इन सर्द पर्दो को आंखो से हटाना है
हटाना है...

रजनीश राय
२७/०५/२०२२
१९:४५

No comments:

Post a Comment