Thursday, July 21, 2022

देश का वर्तमान - Atmavishwas

उठाते ही समाचार पत्र आज का 
झोंका निकला एक मूर्छा का 
महिला खेल योद्धा, थामा आँचल मौत का 
प्रसिद्धि की न कोई कमी, शौर्य था कूटकूट कर भरा 
क्या था कारण न जाने, क्या कमजोर या बहादुर संज्ञा कोई 

खेल जगत में या मनोंरजन पट में  
शिक्षा क्षेत्र या और कुछ प्यार में 
न जाने कितने युवाओं ने 
लगाया असमय गले मौत को 
अधूरा जीवन क्या अधूरे सपने 
सब कुछ अधूरा, खुद हारे हिम्मत 
न बन पाए किसी के सहारे कोई 

क्या सोच जो बनाती कायर 
निडर जवां बनते इतने कमजोर 
अवसाद, खिन्नता, या डिप्रेसन 
एक गहरा अंधकार 
राह न दिखती कोई और 
कुछ न सोच थामे बस मृत्यु की डोर  

आज बहुत व्यथित मन, सोच देश का वर्तमान
युवा है आज भारत की शक्ति, खुद क्यों है आज युवा परेशान 

देश को आगे लाने की कितनी योजनाएं 
आये हम प्रथम हर होड़ में 
लो युवाओं की भी सुध, ये देश से बड़ी प्राथमिकताएं
इस विषय पे शोध कर युवाओं को चेताये 

नौजवानों से करे प्रार्थना, न थामे इस राह को 
मन में रखो खुद्दारी, और देश से प्यार  
उपकार मात पिता का, भविष्य को ढालना शिक्षक का  
हर अंधकार के बाद रौशनी का 

मृत्यु तो अटल 
अंतिम पड़ाव जीवन का 
आरंभ को न लगाओ विराम 
छूटे आरंभ को करो प्रारंभ 
मन से त्याग हर मोह अंधकार का 

रजनीश राय 
२०/१२/२०२१ 
१९:०७  

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