चले सब मित्र कुछ अलग मन में ठान
हम हुए संग सोच करे कुछ ऐसा काम
हुई शिक्षा समाप्त अब जुड़ने का आया
समय इस समाज संग उम्र तमाम
खुशी का आलम एक आज़ाद पंछी सा
ह्रदय की तह में उमंग आपार
हर एक मित्र सोचे किस डगर ले पार
असमंजस माहौल स्थिर सब करें विचार
मित्र ने लिया निश्चय चिकित्सक बन, स्वस्थ बनने को दे अपना योगदान
कुछ मित्रों ने व्यवसाय किसी ने अभियंता को लिया थाम
किसी ने नौकरी को समझा उचित, कोई संग सरकारी विभाग
तो कोई सोचे राजनीति महान
सब को देखा सब कुछ सोचा, आज खड़े हम वह रास्ते
जिसको थामना उम्र तमाम, क्यों है सोच गहरी क्यों मन अशांत
आया जहन में प्रेम देश का, हममें जो प्रति दिन है जीवंत प्राण
राष्ट्रगान करते रोम रोम में, भक्ति से अपने भारत को प्रणाम
सोचा न द्वितीय क्षण भर, लिया सैन्य बल को थाम
हो सुरक्षित हर शख्स, बस मन ले एक यही अरमान
अंदर सुरक्षित तो सोचे सभी, आज सिर्फ उनकी बदौलत हम
हमको भी बनना है ढाल, क्यों न हम भी इस डगर को ले थाम
नौजवानो रखो सोच आप भी, देश को चार क़दम आगे है लाना
आना आपका फ़ौज में, मुमकिन सब को सुरक्षित है रख पाना
हर मां बाप की दुआ में शामिल
वादे में बहनों के हमेशा काबिल
निकले जिधर से मिले सलाम
जिए जब तक रहे शान
गर हुए शहीद तो बने देश की शान।
रजनीश राय
१३/१२/२०२१
१७:२७
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