Saturday, July 30, 2022

प्रथम पृष्ट - Mere Humrahi

सहगामी या हमराह 
हमसफ़र कहो या साथी
आज हंसते मन में कुछ सोचते
याद आए वो दिन लड़कपन के 

निहारना वो एकटक 
करना घंटो आने का इंतज़ार 
देख बालों में अपने हाथ फिराना 
और उनका भी लटो को झटकना 
तोड़ कच्ची इमली उनको रिझाना 
गहरी झील के मटमैले पानी से कमल लाना 
तोता कुतरे अमरुद का लाना 
गहरे जंगल में कच्चे बेरों का लाना 
बिन बात मुस्कराहट चेहरे पे 
बस याद आये वो पहले दिन मोहब्बत के 

मिलना हुआ दस्तूर 
नियम सा लगता जरूर 
वह बातों के दिन
लम्हातों के दिन 
अस्त न हो सूर्य ऐसी आशाओं के दिन 
प्यार सी मीठी बातों के दिन 
याद आते बिन बात रूठने मनाने के दिन 

बीती शिक्षा संग परवान प्यार का 
करते नौकरी उच्च पद आसीन 
शिक्षिका बन वह बांटे ज्ञान   
लिए संग मातृ पिता के सहमिति 
सोच समझ लेकर सबका आशीर्वाद 
हुए हमराह बन एक दूसरे के प्यार के
ये है वह हसीं अध्याय बना प्रथम पृष्ट जो हमारे प्यार का

रजनीश राय 
१३.०४ .२०२२ 
१४:०७ 



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