आज के बच्चे या युवा
क्यों हर माँ बाप है ख़फ़ा
वह संग विश्वास का क्यों है जुदा
बहता नीर यूं नदियों का
बनता संग रास्ता स्वयं उन लहरों का
न रहती कभी नदी या कभी सागर विचलित
इच्छा है कुछ अलग पाने की
कुछ अलग कर जाने की
जैसे हर सोच नयी
फिर हममे क्यों विश्वास की कमी
करते बात इक्सवीं सदी की
सोच बीते समय की
दोनों का मिश्रण
पाए सिर्फ मायूसी
करो विश्वास हर युवा पर
बच्चों की सोच पर
खुला मैदान
या खुला आसमां
दो मौका हर खूबी को
दौर आज विश्वास का
दो सबक सिर्फ आत्मविश्वास का
फ़र्ज़, प्यार के संग
बच्चे क्या हर युवा के संग जुड़ जाओ
रजनीश राय
०३/०६/२०२२
१४:३१
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