Thursday, July 21, 2022

जियो जिंदगी भरपूर - आत्मविश्वास

बढ़ता हर तरफ सिर्फ हाहाकार 
इंसानियत को कर शर्मसार 
मंदिर मस्जिद बनता जा रहा 
राजनीति का द्वार 

लुभावने वादे, प्रतिज्ञा क्या करार 
वचनो की बस लगी भरमार 
खोखली करते आशाओं को 
समाज के आपसी अनुराग 
या होते रिश्तो के बंद द्वार 

हुआ चलन धर्म के ठेकेदारों का 
धर्म से धर्म को उलझाने का
ज्ञान नहीं तानिक जिन्हे 
कहते खुद को गुरु
कार्य करते दीक्षा दिलाने का
मान अखंड अभिमान सा
भिक्षा में चलन सिर्फ नकदी का 

विश्वास नहीं पर धोखा पुरजोर 
हर इंसान लगे ठगा सा 
शिकायत की राह अति कमजोर 
उलझे सब जीवन रुपी चक्रव्यूह में 
लड़ते हर पल 
एक नयी उलझन का मोड़
प्रति पल द्वंद विचार में विचार
प्रतीत जैसे बंद सब मस्तिष्क द्वार 
 
वक्त आया जागो 
और जगाओ समाज को
न बहको न डरो
बस दूर हटाओ 
इन काल रात्रि के सौदागरों को
रात्रि के बाद की रोशनी सिर्फ सुबह की 
न बहक जाओ दिखते उजालों को 

होड़ न रखो सिर्फ पैसे की
जियो जिंदगी भरपूर
हंसी के सायों में 
इंसानियत हो सिर्फ प्रथम अभियान सी 

रजनीश राय
१८/०७/२०२२
११:३२

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