चुनौतियों से भरे इस जीवन में
हम आये बन एक परिंदा
कभी दबे कुछ बोझ तले
कभी उठना तो कभी गिरना
फिर स्वछंद सा इस आसमान में उड़ना
हो जीवन ऊँचा जैसे अम्बर अपना
हुई शादी की बात पक्की
सोच हर पल मस्तिष्क
ब्याह एक दिन
फिर संग बाल गोपाल भी
हमारा जीवन
सिर्फ गृह धर्म
क्या चार दीवारी तक सिमित
आज इस सोच को बदलना
पहली जरुरत हर नारी की
गर है आत्मविश्वास
हम भी रचेंगे इतिहास
हर क्षेत्र में आज स्पर्धा
क्या पुरुष क्या नारी
सोच को करो विकसित
सिर्फ इतनी सी है जिम्मेदारी
संग रखो सूझ बुझ का
वक्त को बांटो
क्यारी क्यारी
दायित्व का अनुभव संग
फिर क्यों डरे हम
कार्य गृह से या हो दफ़्तर
करो कोई व्यवसाय या
कुछ ऑनलाइन या कंप्यूटर
कर्तव्य को बाटना
सिर्फ हो पहल हमारी
इस कोरोना रुपी भय ने
न जाने कितने
नारियों के व्यवसाय खाये
समय बदला अब
क्यों न कुछ करें ऐसा
लाख कोरोना भी न हमें हटा पाए
सब को संग ले चलना
एक उदारहण बन बताना है
सब में अचूक नारी शक्ति
देश को यह विश्वास दिलाना है
पंक्तियाँ लिखता सँजोता हूँ
आज नारी संग देश खड़ा
देश को संजोये हर नारी
रजनीश राय
०१/०६/२०२२
१९:१७
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