Thursday, July 21, 2022

खोखली हंसी - Atamvishwas

आज बैठे कुछ सोचते हम 
देख मित्र के पिता की खोखली हंसी 
दिन याद अभी भी न भूले 
विदेश को भेजने का प्यार और खुशी
 
शब्दों को रख मन में जस के तस 
अंतरात्मा मित्र को टटोलती कुछ बोलती  
क्या रखा इस देश में बेटा 
जाओ जा कर तुम भी दौलत कमाओ 

आया वह दिन था जिसका इंतज़ार 
चला मित्र विदेश उमड़ा जन अपार 
बधाई का लगा ताँता, मात पिता हर्ष फुले न समाये 

वक़्त बिता उम्र से भला कौन जीता 
किन्तु माँ का ह्रदय सिर्फ माँ ही जाने 
लगी तलाशने पुत्र वापिस आने के बहाने 
थामे विवाह की जिद, आया पुत्र खुशी अनंत 
हमको भी दिन याद आये पुराने याराने 

समय की करवट या दिल में  
कौन या क्या छुपाने की आहट 
शब्दों को तोल वादा जल्द आने का 
नव विवाहिता को लिया संग 
करके अभिनन्दन सबको चले विदेश द्वार   

वक़्त चला माँ ने खोयी आस 
आस की राह खामोश भी हुई साँस 
नवजात शिशु से विदेश में खिली किलकारियाँ 
पिता अकेला यहाँ, संग सिर्फ तन्हाईयाँ 

आया संदेश पुत्र का आ जाओ आप भी इस पार
बेच तमाम घर द्वार पिता खुश चला पाने को प्यार
अंचभित सा पाया खुद को वहां 
सब है वहां पर वक्त है कहां, न दोस्त न रिश्ते
सिर्फ फ़ोन पर दोस्तों संग वह खोखली हंसी 

ढूंढता खुशी के पल हर लम्हा कहीं संग सिर्फ है तो फिर वही तन्हाई 
सोचते क्या दौलत संग है तो खुशी या खुशी दौलत से बढ़कर कहीं 

आज देते सलाह नयी पीढ़ी को 
पैसा भी जीवन का चक्र, रहो संभल कर 
हावी न होने दो कभी खुद पर 
दौलत हो आपार, हो संग अपनों का प्यार
दुगना हो जीवन का आधार

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